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कोयले की हवा वाला शहर

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दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और सांस न ले सकने वाली हवा की चर्चा लगभग हर दो चार महीने में देशभर में टीवी पेपर से लेकर आम जनता के बीच हो ही जाती है, विशेष रूप से सर्दियों के समय हरियाणा के किसानों द्धारा खेतों में पुवाल जलाने के चलते दिल्ली हरियाणा सरकार में वार्षिक झाय झाय जरूर हो जाती है। वैसे भी शुद्ध हवा, शुद्ध पानी किसी भी सरकार के एजेंडे में ही नहीं है, और हो भी क्यों इस देश की जनता को शुद्ध हवा और शुद्ध पानी न मिलने पर सरकार से कोई शिकायत भी नहीं। अपने अपने घर में आरओ लगाकर शुद्ध पानी और एयर पयूरिफायर लगाकर हम संतुष्ट हो जाते हैं। कितना अजीब है जो चीज प्रकृति ने बिल्कुल मुफ्त में दी उसे भी बाजार हमें खरीदने पर मजबूर कर रहा है और आम आदमी बाजार को मजबूत करके खुश हो रहा।  राजधानी होने की वजह से कम से कम दिल्ली के प्रदूषण की चर्चा तो होती है पर दिल्ली से हजार किमी दूर कोरबा की हवा में फैले प्रदूषण की चर्चा करने की जरूरत भी देश को महसूस नहीं होती। कोरबा जहाँ भारत ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान है, कोरबा जो भारत की पावर ( बिजली वाला) कैपिटल कहलाता है। कोर...

देवपहरी जलप्रपात

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कोरबा की सतरंगा झील जैसी खूबसूरत जगह देखने के बाद मैं और विनय वहाँ से अगली खूबसूरत जगह देखने निकल गये। सतरंगा झील से करीब पंद्रह किलोमीटर के बाद पहाड़ी शुरू हो गयी। पहाड़ी की घुमावदार सड़क और दोनों तरफ दूर तक फैली हरियाली। धूप होने के बावजूद पहाड़ी और हरियाली के चलते चेहरे पर ठंडी ठंडी हवा टकरा रही थी। पहाड़ी पर बाइक घुमाने का मजा हम जैसे समतल में रहने वालों को अलग ही लगता है। खैर घूमते घामते हम देवपहरी के नजदीक पहुँच गये। बीस पचीस किलोमीटर के रास्ते में चाय की भी सिर्फ एक दुकान थी।  मेन रोड के बाद लोगों ने पूछने पर एक कच्चे रास्ते पर जाने के लिये कहा। बाहर से लोग भले न आये पर देवपहरी, कोरबा के लोगों के लिये सबसे हैपेनिंग जगह है। उसके बावजूद वहाँ तक सड़क तक का न होना प्रशासन के नकारेपन को दिखाता है। खैर इतनी बेहतरीन जगह होने के बावजूद बाहर के पर्यटक न आने का बड़ा कारण यही सब होगा।  देवपहरी जलप्रपात पर सतरंगा की तरह हम अकेले न थे बल्कि ठीक ठाक पर्यटक दिखाई दे रहे थे। बारिश का मौसम कुछ दिन पहले ही खत्म हुआ है सो ऐसी जगहों पर पानी कब अचानक कम अधिक हो जाये इसका तो...

यहाँ आकर उदयपुर भूल जायेंगे

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पिताजी की घूमने और साथ पूरे परिवार को घुमाने की बेहतरीन आदत के चलते भारत के उत्तर पूर्व के अलावा कुछ ही राज्य हैं जहाँ अपने कदम न पड़े थे, उनमें से ही एक था अपने प्रदेश यानि उत्तर प्रदेश का सीमावर्ती राज्य छत्तीसगढ़। फिलहाल 28 सितम्बर 2018 को ये वर्तमान से भूत रह गया जब हम भोपाल से सुबह सबेरे अमरकंटक एक्सप्रेस से विलासपुर पहुंचे। विलासपुर छत्तीसगढ़ राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर है पर मेरे जैसे घुमक्कड़ को इस जगह ने निराश किया। मैं तो छत्तीसगढ़ जल, जंगल और जमीन यानि प्राकृति का साथ खोज रहा था और विलासपुर के आसपास ऐसा कुछ नहीं दिखा। अधिक पूछने पर हर कोई अमरकंटक का नाम बताता पर वहाँ जाना कुछ कारणवश नहीं हो पाया।  खैर कल विलासपुर से कोरबा आना हुआ। कोरबा कोयले के लिये प्रसिद्ध है यहाँ की गेरवा खान एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान है। मन में आया चलो कुछ न सही तो कोयला खदान ही देखकर आयेंगे आखिर एक नया अनुभव होगा। वैसे कोयला खदान कौन देखने आता होगा, मुझे देखकर शायद खदान वालों को कोयला टूरिज्म प्रमोट करने का ख्याल आता जाये। यहाँ दक्षिण पूर्व कोल माइंस कोयला उत्पादन करती है और इसी ...