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माँ विन्ध्यावासिनी के चरणों में अद्वैत का मुडंन

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विन्ध्यवासिनी मतलब जो विन्ध्य में रहती हो अर्थात जिसका निवास विन्ध्य में हो। लोकोक्ति के अनुसार सती के मृत शरीर को लेकर जब भगवान शंकर उद्वेलित भाव में विचरण कर रहे थे तो जहाँ जहाँ सती के अंग गिरे वो इक्यावन स्थान देवी के शक्तिपीठ के रूप में पूजित हुये। फिर सवाल उठता है कि जब अंग गिरने पर सारे शक्तिपीठ बने और उनके नाम भी उस अंग से मिलते जुलते पड़े तो विन्ध्यवासिनी देवी का नाम उस जगह पर निवास करने से क्यों पड़ा जबकि अंग का कोई निवास स्थान तो होता नहीं है। इस सवाल का जवाब भी उस प्रचलित लोकोक्ति में है जिसके अनुसार जब देवकी की आंठवी संतान के तौर पर भगवान कृष्ण ने जन्म लिया तो वासुदेव भगवान कृष्ण को गोकुल छोड़ आये और वहाँ से यशोदा की पुत्री को वापस कारावास लेकर आ गये। कंस ने जब माँ दुर्गा की अवतार कन्या का वध करना चाहा तो वह अन्तरधयान हो गयी ऐसा माना जाता है उसके पश्चात माता ने विन्ध्य के इसी क्षेत्र को अपना निवास बना लिया।  विन्ध्य क्षेत्र मूल रूप से नर्मदा नदी के उत्तर में फैली छोटी छोटी पर्वत श्रृंखला को कहा जाता है। भौगोलिक रूप से देखे तो विन्ध्य कोई एक पर्वत श्रृंखला नहीं...