💯 की नोट पर देखकर इस कुएं की भव्यता का अन्दाजा लगाना भी मुश्किल है
कल शाखा में बैठा था तो कैश बंद होते समय एक कर्मचारी आकर बोला सर के नये नोट रख लीजिये आदत के अनुसार मैंने ये कहते हुये मना किया कि नये नोट का क्या करना खर्चने तो वो भी हैं और इसे आये हुये भी कई दिन हो गये। फिर भी उसने ये कहते हुये नये नोट थमा दिये कि बैंक वाले के पास नये नोट होने चाहिए दूसरे मांग लेते हैं। खैर पहली बार की नयी नोट ध्यान से देखा बैंगनी रंग की, ऐसा लग रहा था जैसे नयी नोटों को पास करने वाला बचपन में चूरन खाने का काफी शौकीन था और उसमें मुफ्त में मिलने वाली रंग बिरंगी नोटों से बेहद प्रभावित। खैर ये नोट तो ऐसी प्रतीत होती है जैसे खट्टे वाले चूरन का रंग ही छूट गया हो। नयी नोटों के साथ एक सकारात्मक बात ये है कि इनके आगे तो गांधी जी हैं पर पीछे भारत के कुछ बड़े प्रतीक हैं। दो हजार की नोट पर चंन्द्रयान, पांच सौ के पीछे लाल किला, दो सौ के पीछे सांची स्तूप और बैंगनी वाली की नोट के पीछे रानी की वाव। पुरुष प्रधान दुनिया में रानी की वाव लगा किसी राजा ने अपनी रानी की याद में कुछ वैसे ही बनवा दिया होगा जैसे ताजमहल मुमताज बेगम की ...